Showing posts with label नीति वाक्य. Show all posts
Showing posts with label नीति वाक्य. Show all posts

Friday, January 18, 2019

नीति वाक्यम्

अनुकरण वाक्यम्

मंत्राधीनं जगत् सर्वं , मंत्राधीना देवता ।
ते मंत्रा: पंडिता धीना, तस्मात् पंडित देवता ।

मन्त्र के अधीन समस्त जगत् होता है , मन्त्रों के अधीन देवता होते हैं ।वे सभी मन्त्र विद्वान् पंडित  के अधीन होते हैं इसलिये इस जगत् में उन्हें देवता कहा जाता है ।

ध्यान रहे विद्वान् चरितवान होना चाहिए ।अलोभवृति, ऐंद्रिय निवृत्ति वाला , देश काल की विधि का ज्ञाता, प्रत्युतपन्न्मति,निर्मल भावी, उदार वृत्ति, मधुर भाषी, प्रभावी  व्यक्तित्त्व वाला  होना चाहिए ।

यथा--

देशकाल विधि निपुनमति, निर्मलभव उदार ।
मधुर वैन नयना सुगड़, सो याजक निरधार ।।

डॉ आशीष जैन शिक्षा शास्त्री दमोह

गाय के गोबर का महत्व

 आयुर्वेद ग्रंथों  में हमारे ऋषि मुनियों ने पहले ही बता दिया गया  था कि   *धोवन पानी पीने का वैज्ञानिक तथ्य और आज की आवश्यकता* वायुमण्डल में...