Thursday, January 10, 2019

वीतराग स्तोत्र

*श्री वीरतराग स्त्रोत*

शिवं शुद्धबुद्धं परं विश्वनाथं,

न देवो न बंधुर्न कर्मा न कर्ता।

न अङ्गं न सङ्गं न स्वेच्छा न कायं,

चिदानन्दरूपं नमो वीतरागम्॥ १॥



न बन्धो न मोक्षो न रागादिदोष:,

न योगं न भोगं न व्याधिर्न शोक:।

न कोपं न मानं न माया न लोभं,

चिदानन्दरूपं नमो वीतरागम्॥ २॥



न हस्तौ न पादौ न घ्राणं न जिह्वा,

न चक्षुर्न कर्ण न वक्त्रं न निद्रा।

न स्वामी न भृत्यो न देवो न मत्र्य:,

चिदानन्दरूपं नमो वीतरागम्॥ ३॥



न जन्म न मृत्यु: न मोहं न चिंता,

न क्षुद्रो न भीतो न काश्र्यं न तन्द्रा।

न स्वेदं न खेदं न वर्णं न मुद्रा,

चिदानन्दरूपं नमो वीतरागम्॥ ४॥



त्रिदण्डे त्रिखण्डे हरे विश्वनाथं,

हृषी-केशविध्वस्त-कर्मादिजालम्।

न पुण्यं न पापं न चाक्षादि-गात्रं,

चिदानन्दरूपं नमो वीतरागम्॥ ५॥



न बालो न वृद्धो न तुच्छो न मूढो,

न स्वेदं न भेदं न मूर्तिर्न स्नेह:।

न कृष्णं न शुक्लं न मोहं न तंद्रा,

चिदानन्दरूपं नमो वीतरागम्॥ ६॥



न आद्यं न मध्यं न अन्तं न चान्यत्,

न द्रव्यं न क्षेत्रं न कालो न भाव:।

न शिष्यो गुरुर्नापि हीनं न दीनं,

चिदानन्दरूपं नमो वीतरागम्॥ ७॥



इदं ज्ञानरूपं स्वयं तत्त्ववेदी,

न पूर्णं न शून्यं न चैत्यस्वरूपम्।

न चान्यो न भिन्नं न परमार्थमेकं,

चिदानन्दरूपं नमो वीतरागम्॥ ८॥



आत्माराम - गुणाकरं  गुणनिधिं, चैतन्यरत्नाकरं,

सर्वे भूतगता-गते सुखदुखे, ज्ञाते त्वयि सर्वगे,

त्रैलोक्याधिपते  स्वयं  स्वमनसा, ध्यायन्ति योगीश्वरा:,

वंदे तं हरिवंशहर्ष-हृदयं, श्रीमान् हृदाभ्युद्यताम्॥ ९॥

Wednesday, January 9, 2019

स्तोत्र पाठ

*श्री आद्याष्टक स्त्रोत*

अद्य मे सफलं जन्म,    नेत्रे च सफले मम।

त्वामद्राक्षं यतो देव,   हेतुमक्षयसंपद:॥ १॥



अद्य संसार-गम्भीर,  पारावार:  सुदुस्तर:।

सुतरोऽयं क्षणेनैव, जिनेन्द्र! तव दर्शनात्॥ २॥



अद्य मे क्षालितं गात्रं, नेत्रे च विमले कृते।

स्नातोऽहं धर्मतीर्थेषु, जिनेन्द्र! तव दर्शनात्॥ ३॥



अद्य मे सफलं जन्म, प्रशस्तं सर्वमङ्गलम्।

संसारार्णवतीर्णोऽहं, जिनेन्द्र! तव दर्शनात्॥ ४॥



अद्य कर्माष्टक-ज्वालं, विधूतं सकषायकम्।

दुर्गतेर्विनिवृत्तोऽहं,  जिनेन्द्र! तव दर्शनात्॥ ५॥



अद्य सौम्या ग्रहा: सर्वे, शुभाश्चैकादश-स्थिता:।

नष्टानि विघ्नजालानि, जिनेन्द्र! तव दर्शनात्॥ ६॥



अद्य नष्टो महाबन्ध:, कर्मणां दु:खदायक:।

सुख-सङ्गं समापन्नो, जिनेन्द्र! तव दर्शनात्॥ ७॥



अद्य कर्माष्टकं नष्टं, दु:खोत्पादन-कारकम्।

सुखाम्भोधि-र्निमग्नोऽहं, जिनेन्द्र! तव दर्शनात्॥ ८॥



अद्य मिथ्यान्धकारस्य,  हन्ता ज्ञान-दिवाकर:।

उदितो मच्छरीरेऽस्मिन्, जिनेन्द्र! तव दर्शनात्॥ ९॥



अद्याहं सुकृतीभूतो,  निर्धूताशेषकल्मष:।

भुवन-त्रय-पूज्योऽहं, जिनेन्द्र! तव दर्शनात्॥ १०॥



अद्याष्टकं पठेद्यस्तु,  गुणानन्दित-मानस:।

तस्य सर्वार्थसंसिद्धि-र्जिनेन्द्र! तव दर्शनात्॥ ११॥

Tuesday, January 8, 2019

मिलते जुलते रहा करो - कविता



*मिलते जुलते रहा करो*

धार वक़्त की बड़ी प्रबल है,
इसमें लय से बहा करो,
जीवन कितना क्षणभंगुर है,
मिलते जुलते रहा करो।

यादों की भरपूर पोटली,
क्षणभर में न बिखर जाए,
दोस्तों की अनकही कहानी,
तुम भी थोड़ी कहा करो।

हँसते चेहरों के पीछे भी,
दर्द भरा हो सकता है,
यही सोच मन में रखकर के,
हाथ दोस्त का गहा करो।

सबके अपने-अपने दुःख हैं,
अपनी-अपनी पीड़ा है,
यारों के संग थोड़े से दुःख,
मिलजुल कर के सहा करो।

किसका साथ कहाँ तक होगा,
कौन भला कह सकता है,
मिलने के कुछ नए बहाने,
रचते-बुनते रहा करो।

मिलने जुलने से कुछ यादें,
फिर ताज़ा हो उठती हैं,
इसीलिए यारों नाहक भी,
मिलते जुलते रहा करो।🌹

Saturday, January 5, 2019

चार अनुयोग को समझे

*जैन दर्शन के चारों अनुयोग को एक उदाहरण से समझे*

एक माँ अपने छोटे से बच्चे को लेकर बाजार गई,बच्चा रास्ते में गिरा और ज़ोर से रोने लगा,वह माँ उसको चुप करने के लिये क्या उपाय करती है।
*पहला उपाय* माँ कहती है की जब दीदी गिरी थी वो तो नहीं रोई,फिर तू क्यों रोता है,चुप हो जाओ अर्थात आचार्य भगवंत हमसे कहते हैं कि पूर्व में जो महापुरुष हुए हैं उनको भी उनके कर्म के उदय मे कैसी कैसी विपत्तियां आईं वह तो अपने धर्म से विचलित नहीं हुए तुम क्यों विचलित होते हो?उनकी तरह तुम भी धर्म में लगो और पाप से बचो। *ये प्रथमानुयोग की पद्धति है*|
*दूसरा उपाय* माँ कहती है कि सुबह दीदी से झगड़ा किया था इसलिए तुम्हे लगी!अर्थात आचार्य भगवंत हमें समझाते हैं कि जैसे पूर्व में परिणाम किये थे अब उसका फल भुगत रहे है,अपने परिणाम सम्हालो,इन्हीं को सम्हालने से अपना कल्याण हो सकता है।ये *करणानुयोग की पद्धति है*
*तीसरा उपाय* माँ कहती है देख कर तो चलते नहीं हो अब गिर गये तो रोते हो,अर्थात आचार्य भगवंत हमें समझाते है कि बाह्य आचरण को सम्हालो व्रत,नियम,संयम,तप आदि एवं अंतरंग में वीतराग भाव धारण करोगे तो तुम्हारा कल्याण होगा ये *चरणानुयोग की पद्धति है*
*चौथा उपाय* माँ बच्चे को गोद में लेती है और कहती है वो तो घोड़ा गिरा था तू तो मेरा राजा बेटा है तुझे थोड़े ही चोट लगती है अर्थात आचार्य भगवंत हमें समझाते है कि कहाँ तुम इस देह में आपा मान रहे हो वो तो पर्याय हैं,इन पर्याय में हर्ष विषाद नहीं करना चाहिए अपना स्व-भाव देखना चाहिए! *ये द्रव्यानुयोग की पद्धति है*
👉इस तरह हम किसी भी अनुयोग के माध्यम से अपने दुःख को दूर कर सकते हैं।
*🔴जैनम् जयतु शासनम् वंदे श्री वीरशासनम्🔴*

शरीर के अंगों की वैज्ञानिकता

💐

*(वैज्ञानिकों ने बताया कितना दिलचस्प है इंसान का शरीर )*

*अद्भुत है इंसान का शरीर*

*जबरदस्त फेफड़े*

हमारे फेफड़े हर दिन 20 लाख लीटर हवा को फिल्टर करते हैं. हमें इस बात की भनक भी नहीं लगती. फेफड़ों को अगर खींचा जाए तो यह टेनिस कोर्ट के एक हिस्से को ढंक देंगे.

*ऐसी और कोई फैक्ट्री नहीं*

हमारा शरीर हर सेकंड 2.5 करोड़ नई कोशिकाएं बनाता है. साथ ही, हर दिन 200 अरब से ज्यादा रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है. हर वक्त शरीर में 2500 अरब रक्त कोशिकाएं मौजूद होती हैं. एक बूंद खून में 25 करोड़ कोशिकाएं होती हैं.

*लाखों किलोमीटर की यात्रा*

इंसान का खून हर दिन शरीर में 1,92,000 किलोमीटर का सफर करता है. हमारे शरीर में औसतन 5.6 लीटर खून होता है जो हर 20 सेकेंड में एक बार पूरे शरीर में चक्कर काट लेता है.

*धड़कन, धड़कन*

एक स्वस्थ इंसान का हृदय हर दिन 1,00,000 बार धड़कता है. साल भर में यह 3 करोड़ से ज्यादा बार धड़क चुका होता है. दिल का पम्पिंग प्रेशर इतना तेज होता है कि वह खून को 30 फुट ऊपर उछाल सकता है.

*सारे कैमरे और दूरबीनें फेल*

इंसान की आंख एक करोड़ रंगों में बारीक से बारीक अंतर पहचान सकती है. फिलहाल दुनिया में ऐसी कोई मशीन नहीं है जो इसका मुकाबला कर सके.

*नाक में एंयर कंडीशनर*

हमारी नाक में प्राकृतिक एयर कंडीशनर होता है. यह गर्म हवा को ठंडा और ठंडी हवा को गर्म कर फेफड़ों तक पहुंचाता है.

*400 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार*

तंत्रिका तंत्र 400 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से शरीर के बाकी हिस्सों तक जरूरी निर्देश पहुंचाता है. इंसानी मस्तिष्क में 100 अरब से ज्यादा तंत्रिका कोशिकाएं होती हैं.

*जबरदस्त मिश्रण*

शरीर में 70 फीसदी पानी होता है. इसके अलावा बड़ी मात्रा में कार्बन, जिंक, कोबाल्ट, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फॉस्फेट, निकिल और सिलिकॉन होता है.

*बेजोड़ झींक*

झींकते समय बाहर निकले वाली हवा की रफ्तार 166 से 300 किलोमीटर प्रतिघंटा हो सकती है. आंखें खोलकर झींक मारना नामुमकिन है.

*बैक्टीरिया का गोदाम*

इंसान के वजन का 10 फीसदी हिस्सा, शरीर में मौजूद बैक्टीरिया की वजह से होता है. एक वर्ग इंच त्वचा में 3.2 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं.

*ईएनटी की विचित्र दुनिया*

आंखें बचपन में ही पूरी तरह विकसित हो जाती हैं. बाद में उनमें कोई विकास नहीं होता. वहीं नाक और कान पूरी जिंदगी विकसित होते रहते हैं. कान लाखों आवाजों में अंतर पहचान सकते हैं. कान 1,000 से 50,000 हर्ट्ज के बीच की ध्वनि तरंगे सुनते हैं.

*दांत संभाल के*

इंसान के दांत चट्टान की तरह मजबूत होते हैं. लेकिन शरीर के दूसरे हिस्से अपनी मरम्मत खुद कर लेते हैं, वहीं दांत बीमार होने पर खुद को दुरुस्त नहीं कर पाते.

*मुंह में नमी*

इंसान के मुंह में हर दिन 1.7 लीटर लार बनती है. लार खाने को पचाने के साथ ही जीभ में मौजूद 10,000 से ज्यादा स्वाद ग्रंथियों को नम बनाए रखती है.

*झपकती पलकें*

वैज्ञानिकों को लगता है कि पलकें आंखों से पसीना बाहर निकालने और उनमें नमी बनाए रखने के लिए झपकती है. महिलाएं पुरुषों की तुलना में दोगुनी बार पलके झपकती हैं.

*नाखून भी कमाल के*

अंगूठे का नाखून सबसे धीमी रफ्तार से बढ़ता है. वहीं मध्यमा या मिडिल फिंगर का नाखून सबसे तेजी से बढ़ता है.

*तेज रफ्तार दाढ़ी*

पुरुषों में दाढ़ी के बाल सबसे तेजी से बढ़ते हैं. अगर कोई शख्स पूरी जिंदगी शेविंग न करे तो दाढ़ी 30 फुट लंबी हो सकती है.

*खाने का अंबार*

एक इंसान आम तौर पर जिंदगी के पांच साल खाना खाने में गुजार देता है. हम ताउम्र अपने वजन से 7,000 गुना ज्यादा भोजन खा चुके होते हैं.

*बाल गिरने से परेशान*

एक स्वस्थ इंसान के सिर से हर दिन 80 बाल झड़ते हैं.

*सपनों की दुनिया*

इंसान दुनिया में आने से पहले ही यानी मां के गर्भ में ही सपने देखना शुरू कर देता है. बच्चे का विकास वसंत में तेजी से होता है.

*नींद का महत्व*

नींद के दौरान इंसान की ऊर्जा जलती है. दिमाग अहम सूचनाओं को स्टोर करता है. शरीर को आराम मिलता है और रिपेयरिंग का काम भी होता है. नींद के ही दौरान शारीरिक विकास के लिए जिम्मेदार हार्मोन्स निकलते हैं.

*OUR BODY IS VERY PRECIOUS*
*PLEASE TAKE CARE OF YOURSELF*

🙏🏻🙏🏻🙏🏻

मुनि श्री योगसागर जी की भव्य आगवानी दमोह नगर में

मुनि श्री योगसागर जी की दमोह नगर में भव्य आगवानी 

Wednesday, January 2, 2019

जन्म राशि के अनुसार किस भगवान की मूर्ति स्थापना करनी चाहिए

मंदिर में किस श्रावक को कौन से भगवान  की मूर्ति विराजमान करना चाहिए । कौन से भगवान आपकी राशि पर सर्वोत्तम उत्तम एवम मध्यम हैं

 *जानिए अपनी जन्म राशि के अनुसार*

*जानिए अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार*

*जानिए अपने प्रचलित नामाक्षर के अनुसार*

 https://youtu.be/egF_UgKCh-g

*मेष राशि वाले श्रावक के लिए*
*वृषभ राशि*
*मिथुन राशि*
*कर्क राशि*
*सिंह राशि वाले श्रावकों के लिए*
 https://youtu.be/j__2q4YpuxE
 https://youtu.be/6Gi1MgnpQUY
 https://youtu.be/i5NA7d_TEW0
https://youtu.be/8Ryv_rIlv7w
 https://youtu.be/EABmUcMUf7E

गाय के गोबर का महत्व

 आयुर्वेद ग्रंथों  में हमारे ऋषि मुनियों ने पहले ही बता दिया गया  था कि   *धोवन पानी पीने का वैज्ञानिक तथ्य और आज की आवश्यकता* वायुमण्डल में...