राष्ट्रं चैत्यालयं यस्य प्रजामेव देवता ।
मन्ये सेवायां पुण्यं स:राज्ञे नमो नमः।।
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जो राष्ट्र को मंदिर और प्रजा को उसका देवता मानता हो तथा उसकी सेवा में पुण्य मानता हो वही राजा (प्रतिनिधि) नमस्कारणीय है । उसे प्रणाम हो ।
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